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Wednesday, 8 June 2016

NGT ने कहा, दिल्ली में पानी की क्वॉलिटी बताएं


आरओ से पानी की बर्बादी रोके जाने के मुद्दे पर नैशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (एनजीटी) ने सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (सीपीसीबी) को राजधानी में अलग-अलग जगहों पर सप्लाइ होने वाले पीने के पानी की क्वॉलिटी की जांच का निर्देश दिया है। एनजीटी अध्यक्ष जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अगुवाई वाली वकेशन बेंच ने सीपीसीबी को निर्देश दिया कि वह अलग-अलग इलाकों में जांच करे और उन घरों से पानी के सैंपल ले जहां दिल्ली जल
बोर्ड या निगम की ओर से पानी की सप्लाइ की जा रही है। उसे दिल्ली में पानी की सप्लाइ करने वाले दूसरे स्रोतों और टैंकों से भी पानी के नमूने जमा कर जांच करने का निर्देश दिया गया है। बेंच ने मामले में अगली सुनवाई के लिए 10 अगस्त की तारीख तय करते हुए बोर्ड से तब तक इसकी रिपोर्ट देने के लिए कहा। एनजीटी ने यह आदेश 'फ्रेंड्स' नाम की एनजीओ की याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। ऐडवोकेट सुग्रीव दुबे के जरिए दाखिल इस याचिका में ग्रीन बेंच से मांग की गई है कि वह आरओ बनाने वालों को इसकी बिक्री करने से रोके या इसकी मशीन में सुधार कर आरओ प्रक्रिया के दौरान वेस्ट वॉटर के रीसाइकल की व्यवस्था करे, जिससे आम जनता के हिस्से के 80 फीसदी पानी की बर्बादी न हो। एनजीओ के सेक्रटरी शरद तिवारी ने बताया कि सुनवाई के दौरान वॉटर क्वॉलिटी इंडिया असोसिएशन (WQIA) को छोड़कर किसी ने भी सप्लाइ होने वाले ट्रीटेड पानी के लिए आरओ के इस्तेमाल के सपॉर्ट में कोई दलील नहीं दी। इससे पहले, मिनिस्ट्री ऑफ वॉटर रिसोर्सेज और सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड समेत दूसरे प्रतिवादियों की ओर से मामले में जवाब दायर करने के लिए कुछ और समय दिए जाने की मांग की गई। इस पर बेंच ने उन्हें आखिरी मौका देते हुए दो हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने के लिए कहा। दिल्ली एंड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट असोसिएशन (डीडीसीए) की मांग पर उसे भी जवाब के लिए दो हफ्तों की मोहलत दी गई है। एनजीओ की ओर से दायर याचिका में डीडीसीए पर आरोप लगाया गया था कि वह फिरोजशाह कोटला ग्राउंड के रखरखाव के लिए आरओ से ट्रीटेड पीने के पानी का इस्तेमाल कर रही है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि 31 एजुकेशनल इंस्टिट्यूशन्स में में आरओ के वॉटर प्लांट्स लगाने वाली बिजली कंपनी टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) इन प्लांट्स के जरिए प्रति घंटा लगभग 750 लीटर पानी बर्बाद कर रही है। इस याचिका पर ट्राइब्यूनल ने दिल्ली जल बोर्ड, डीडीसीए और टीपीडीडीएल से जवाब मांगा था। याचिका के मुताबिक, आरओ सिस्टम की वजह से काफी लोगों में पीने योग्य पानी की क्वॉलिटी को लेकर सोच प्रभावित हुई है। कुछ ही लोगों को आरओ सिस्टम के जरिए पानी मिल रहा है। आरओ सिस्टम की संख्या बढ़ने से 80 फीसदी पानी की बर्बादी हो रही है और इस वजह से ग्राउंडवॉटर पर भी बुरा असर पड़ रहा है। आरओ सिस्टम उपलब्ध करवाने की बजाय सरकार को यह देखना चाहिए कि किसी भी वजह से नदियां प्रदूषित न हों।

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