Pages

Follow by Email

Tuesday, 7 June 2016

जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय


सत्ता में आने के बाद एनडीए सरकार ने जल प्रबंधन, जल संरक्षण, जल सुरक्षा और कृषि में जल संसाधन का ज्यादा उपयोग और उद्योग के साथ-साथ घरेलू कार्यों में जल के उपयोग पर अधिक ध्यान केंद्रित किया है । जल (पानी) हर किसी के जीवन जीने और आजीविका के लिए आवश्यक है। इस मंत्रालय ने सभी हिस्सेदारों से विचार-विमर्श और सक्रिय भागीदारी स्थापित कर बेहतर जल
संसाधनों के विकास और प्रबंधन के लिए रणनीति तैयार की है।
1. नमामि गंगे (गंगा सफाई)
केंद्रीय बजट 2015-16 में गंगा सफाई के लिए 2100 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। "नमामि गंगे"-एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का मुख्य उद्देश्य इस पवित्र नदी को प्रदूषण मुक्त कराना है। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) ने गंगा किनारे बसे सभी 118 शहरों/कस्बों में स्थिति का आकलन करने के लिए व्यापक उपायों की शुरूआत की है। ये कार्य पांच प्रमुख क्रेन्द्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (सीपीएसयू) जैसे डब्ल्यूएपीसीओएस, ईआईएल,एनबीसीसी,ईपीआईएल और एनपीसीसी को दिया गया है। स्वच्छ गंगा राष्ट्रीय मिशन के तहत गंगा किनारे बसे हुए ग्राम पंचायतों के प्रधानों के साथ एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। यह इस तरह का पहला प्रायास था जिसमें गंगा सफाई परियोजना के दौरान गंगा किनारे बसे गांवों के सरपंच, मुखिया और ग्राम प्रधानों को भागीदार बनाया गया। इन लोगों को ''गंगा ग्राम''की अवधारणा के बारे में समझाया गया।इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंगा मिशन को आम लोगों का आंदोलन बनाना है। कचरा साफ करने वाला पांच जलयान गंगा नदी में इलाहाबाद, कानपुर, बनारस, शुक्लागंज (उन्नाव) और पटना में तथा यमुना नदी में वृंदावन, मथुरा में लगा है।   
2. प्रधानमंत्री कृषि संचय योजना (पीएमकेएसवाई)
प्रधानमंत्री कृषि संचय योजना (पीएमकेएसवाई) को किसानों के अनुकूल बनाया गया है। राज्य स्तर पर सीडब्ल्यूसी के क्षेत्रीय कार्यालयों में सीएडी सेल की स्थापना की गई है जिसका उद्देश्य किसानों और जल उपभोक्ता संघों (डब्ल्यूयूए) के साथ सहभागिता बढ़ाना है। इस योजना की शुरूआत 2015-16 से 2019-20 तक के लिए 30000 करोड़ रुपये की केन्द्रीय हिस्सेदारी के साथ की गई है। पीएमकेएसवाई और एआईबीपी के अंतर्गत 2015-16 के लिए कुल केंद्रीय सहायता करीब 4200 करोड़ रुपये की जारी की गई है। एआईबीपी/सीएडीडब्ल्यूएम के तहत परियोजनाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए46 बड़ी और मध्यम परियोजनाओं को 2019 तक पूरा करने की प्राथमिकता तय की गई है। इन 46 प्राथमिकता वाली परियोजनाओं में से 23 परियोजनाओं को 2017 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जल उपभोक्ता संघों (WUA) ने अब तक तीन प्रशिक्षण कार्यक्रम लुधियाना और औरंगाबाद शहरों सहित आयोजित किया गया है। 
3. जल क्रांति अभियान 
देश में जल संरक्षण और प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए "जल क्रांति अभियान" की शुरूआत 5 जून 2015 को पूरे भारत में किया गया जिसमें सभी साझेदारों के समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण को समाहित करते हुए जन आंदोलन का आह्वान किया गया। इस जल क्रांति अभियान के तहत हरेक जिले से वैसे दो गांवों को "जल ग्राम'" के तहत चुना जाता है जहां पानी की विकट समस्या है और फिर इसके समाधान के लिए क्रेन्द्रीय और राज्य प्रायोजित योजनाओं जैसे एआईबीपी, मनरेगा आदि के तहत व्यापक जल सुरक्षा योजना तैयार की जाती है। अब तक 1000 से ज्यादा "जल ग्राम"गांवों की पहचान की गई है और इनमें से कुछ गांवों के लिए जल सुरक्षा योजना भी तैयार की गई है।   
4.  सामान्य भूजल के लिए ऑनलाइन अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करना
केन्द्रीय भूमि जल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए) भूमि जल विकास और प्रबंधन को संचालित एवं नियंत्रित तथा उससे संबंधित जरूरी दिशा-निर्देश जारी करता है । उद्योगों/ बुनियादी ढांचा/ खनन परियोजनाओं को गैर-अधिसूचित क्षेत्रों में भूजल निकासी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त करना आवश्यक होता है। प्राप्त प्रस्तावों पर सीजीडब्ल्यूए द्वारा बनाये गये दिशा-निर्देशों के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है। इससे पहले भूमि जल निकासी के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र निर्धारित प्रोफार्मा पर हस्त-लिखित ही अग्रसारित किया जाता था। प्रक्रिया को उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए भूजल अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने हेतु आवेदन की प्रसंस्करण का वेब आधारित एप्लीकेशन विकसित एवं शुरू किया गया है। इस कारण अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, आसान, समयानुकूल और प्रभावी हो गई है। इसके माध्यम से अब तक 700 से ज्यादा आवेदन पत्र प्राप्त हुए हैं।
5. एनएक्यूयूआईएम
मंत्रालय भूजल निकासी के उच्च स्तर के क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर मानचित्रण कर रही है ताकि अत्यधिक दोहन और उससे जिन 10 प्रभावी राज्यों हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन से ज्यादा असर हो रहा है, ऐसे करीब 8.89 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को में बारहवीं योजना में सम्मिलित किया है।वैज्ञानिक जल प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए "राष्ट्रीय जलवाही प्रबंधन योजना" (एनएक्यूयूआईएम) को प्राथमिकता दी गई है।इस कार्यक्रम पहले तीन वर्षों में शुरू भी नहीं हो पाया और इसमें गति दिसंबर 2014 के बाद आई। इस कार्यक्रम का उद्देश्य 2022 के अंत तक देश के सभी जलभृतों (जलवाही) का (कुल नक्शा क्षेत्र 23 लाख वर्ग किलोमीटर) खाका तैयार करना है। 2016 के जनवरी तक 1.038 वर्ग किलोमीटर का मानचित्र तैयार कर लिया गया है। इस परियोजना के माध्यम से हमें जलवाही स्तर के स्थान का, आकार का और भंडारण क्षमता का तथा शोषण स्तर और संरचना को चार्ज करने के लिए आवश्यक जलवाही स्तर का पता चलेगा। परिदृश्य योजना और जल प्रबंधन योजना से हमें जल क्षेत्र को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिला था।
6. "जल संचयन": जल संरक्षण और पूर्ति के लिए मोबाइल ऐप
सरकार ने जल संरक्षण और पूर्ति के लिए "जल संचयन" नामक मोबाइल ऐप हाल ही में लांच किया है। यह सेवा हिन्दी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है, साथ ही यह उपयोगकर्ता के अनुकूल एंड्रॉयड आधारित है जहां एक ही मंच पर वर्षा जल संचयन के बारे में सारी जानकारी उपलब्ध है।  इस सेवा के माध्यम से उपयोगकर्ता को स्थान की स्थिति तथा वर्षा जल के संचयन से संबंधित जानकारी मिल जाती है। इसके साथ ही यह योजनाबद्ध प्रारूप, लाभ और संचालन तथा रखरखाव के पहलुओं की भी जानकारी प्रदान करता है। इसके अलावा यह अधिकारियों, एजेंसियों, तकनीकी संस्थानों और जमीनी सामुदायिक जल क्षेत्र में काम कर रहे संगठनों की भी जानकारी देता है। इसके अलावा यह उपयोगकर्ता को यह आजादी भी देता है कि उसे किसी भी स्थान के जल स्तर और वहां की औसत वर्षा के बारे में जानकारी मिले।
इस एप्लिकेशन को इस तरह से विकसित किया गया है कि इससे शीर्ष और भूतल दोनों सतहों का मूल्यांकन किया जा सके। इसके माध्यम से हमें वर्षा जल संचयन संरचना और उसके अनुमानित लागत के बारे में भी जानकारी मिलती है। इसमें सामान्य रखरखाव युक्तियाँ और वर्षा जल संचयन संरचनाओं के ऑपरेशन भी सूचीबद्ध हैं। इस एप्लिकेशन के माध्यम से आम जनता को वर्षा जल संचयन के सवालों के जवाब से काफी लाभ मिला है, साथ ही उन्हें अनुमानित लागत एवं संरचना की भी जानकारी मिली है।

No comments:

Post a Comment


This free script provided by
JavaScript Kit

Follow by Email