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Wednesday, 8 June 2016

CBI कोर्ट ने भ्रष्ट अध‍िकारी के परिजनों को भी माना भ्रष्टाचार का दोषी, सुनाई 5-5 साल की सजा


जबलपुर के सीबीआई कोर्ट ने एक भ्रष्ट सरकारी अध‍िकारी, उसकी पत्नी, बेटे और बहू को सजा सुनाते हुए कहा कि अगर एक भ्रष्ट अधिकारी के परिजन रिश्वतखोरी से कमाए गए पैसों का इस्तेमाल करते हैं, तो वे भी बराबर के दोषी हैं. शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट के जस्टिस योगेश चंद्र गुप्ता ने डिफेंस अकाउंट्स डिपार्टमेंट में बतौर डिप्टी अकाउंटेंट तैनात सूर्य कांत गौर पर अपने परिवार के तीन लोगों के अकाउंट में सरकारी फंड से 94 लाख रुपये
ट्रांसफर करने के जुर्म में पांच साल की सजा सुनाई. कोर्ट ने गौर के अलावा उसकी विनिता गौर पत्नी, बेटे श‍िश‍िर गौर और बहू सुनीता गौर को पांच साल कैद की सजा सुनाई है और चारों पर ढाई-ढाई लाख रुपये का फाइन भी लगाया.

6 साल पुराने केस में मिली सजा 
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, सीबीआई ने जुलाई, 2010 में गौर के ठिकानों पर छापमेारी की थी, जिसमें 94 लाख रुपये के लेनदेन के रिकॉर्ड्स मिले थे. ये आय से अध‍िक संपत्त‍ि का मामला था. सीबीआई के वकील प्रतीश जैन ने बताया कि कोर्ट ने चार्जशीट और सबूतों के आधार पर दोषियों को सजा सुनाई और उन पर जुर्माना भी लगाया.

पोते को भी मिली दादा की घूसखोरी की 'सजा' 
शिश‍िर गौर और उसकी पत्नी और माता-पिता के जले जाने के बाद उसका 5 साल का बेटा अकेला रह गया. परिवार के निवेदन पर कोर्ट ने 5 साल के बच्चे को अपने परिवार के साथ जेल में रहने की इजाजत दे दी. बच्चे को जेल में श‍िफ्ट कर दिया गया है.

कानून में इस तरह की सजा का प्रावधान 
वरिष्ठ सरकारी वकील सतीश दिनकर ने बताया, 'अगर गैरकानूनी लेनदेन के सबूत मिलते हैं तो प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट में इस तरह की सजा के प्रावधान हैं.' उन्होंने बताया कि आय से अध‍िक संपत्त‍ि के मामले में रिश्तेदार भी दोषी हो सकते हैं.

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