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Friday, 10 June 2016

साइबर फ्राड रोकने की नीति

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। बैंकों में साइबर अपराध से जुड़ी घटनाओं में तेजी से हो रही बढ़ोतरी और इसे रोकने में बैंकों की नाकामयाबी को देखते हुए रिजर्व बैंक ने अब सख्ती करने का फैसला कर लिया है। आरबीआइ ने गुरुवार को सभी बैंकों को यह निर्देश दिया है कि वह अपने स्तर पर साइबर अपराध व फ्राड रोकने के लिए नीति बनाये।यह नीति उनकी मौजूदा सूचना प्रौद्योगिकी नीति से अलग होनी चाहिए। साथ ही इसे बैंक के बोर्ड की मंजूरी मिली होनी
चाहिए।पिछले हफ्ते ही आरबीआइ ने साइबर फ्राड रोकने में बैंकों की सुस्ती पर कड़ी प्रतिक्रिया जताई थी। केंद्रीय बैंक ने यहां तक कहा था कि भारतीय बैंक के एटीएम में अभी तक नकली एटीएम कार्ड को रोकने की भी व्यवस्था नहीं है। आरबीआइ ने कहा है कि हर बैंक में अलग अलग तकनीकी का इस्तेमाल हो रहा है और हर बैंक के समक्ष साइबर फ्राड की अलग चुनौती है। इसलिए इन बैंकों के पास इनसे निपटने की नीति भी अलग अलग होनी चाहिए।
बैंकों को कहा गया है कि वह अपने उत्पादों, सूचना प्रौद्योगिकी तकनीकी के इस्तेमाल आदि की समीक्षा करते हुए बैंक अपने समक्ष जोखिम व उससे निपटने के उपायों की समीक्षा करते हुए साइबर फ्राड नीति बनाये। इस सदंर्भ में बैंकों को कहा गया है कि वे साइबर ऑपरेशन सेंटर (सीओसी) का गठन करे जो साइबर फ्राड की चुनौतियों से निपटने के लिए कदम उठाएगा।

बैंकों से यह भी कहा गया है कि वह अपने नेटवर्क और डाटाबेस को सुरक्षित करने की भी पूरी व्यवस्था करे और नई नीति में इस बारे में रणनीति का उल्लेख होना चाहिए। साइबर हमले को रोकने की भी रणनीति बैंकों के पास होनी चाहिए।

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