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Wednesday, 8 June 2016

परमाणु ऊर्जा और जलवायु न्याय में सहयोग बढ़ाएंगे भारत-अमेरिका


भारत एवं अमेरिका ने आर्थिक संबंधों एवं असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और पेरिस जलवायु समझौते को जल्द से जल्द क्रियान्वित करके ‘जलवायु न्याय’ के लिए काम करने का संकल्प लिया है। अपनी अमेरिका यात्रा के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा से व्हाइट हाउस के ओवल ऑफ़िस में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच पिछले दो वर्षों में ये सातवीं मुलाकात है। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्वीपक्षीय सहयोग बढ़ाने के अहम मुद्दों पर बातचीत हुई।प्रधानमंत्री मोदी के साथ करीब घंटे भर चली बातचीत के बाद संयुक्त रूप से पत्रकारों को संबोधित करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने कहा कि दो सबसे बड़े लोकतंत्रों, भारत और अमेरिका के लिए साझेदारी को गहन और व्यापक करना स्वाभाविक है। एनएसजी की भारत की सदस्यता के संबंध में चीन के विरोध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि एनएसजी का हिस्सा होने के नाते भारत को समर्थन का संकेत दिया। ओबामा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत को प्रौद्योगिकी की जरूरत है जो उसकी प्रगति और समृद्धि के लिए महत्वपूर्ण हो। भारत की युवा शक्ति पर जोर देते हुए राष्ट्रपति बराक ओबामा ने कहा कि भारत युवाओं का देश है और अमेरिका भारत के युवाओं की प्रतिभा से अच्छी तरह अवगत है। उन्होंने कहा कि दोनों देश भविष्य में मिलकर काम करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों नेताओं ने व्यापक मुद्दों पर, खासकर द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई पर ले जाने के तरीकों पर विचार-विमर्श किया। नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के भारत को मिसाइल प्रौद्योगकी नियंत्रण व्यवस्था (एमटीसीआर) तथा परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में सदस्यता के लिए मदद एवं समर्थन के लिए ओबामा के प्रति आभार व्यक्त किया। भारत एवं अमेरिका ने आर्थिक संबंधों एवं असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और पेरिस जलवायु समझौते को जल्द से जल्द क्रियान्वित करके ‘जलवायु न्याय’ के लिए काम करने का भी संकल्प लिया।प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा की मुलाकात के बाद विदेश सचिव एस. जयशंकर ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए बताया कि भारत में 6 परमाणु रिएक्टर लगाने पर अमेरिका के साथ सहमति बन गई हैं। उन्होंने बताया कि दोनों नेताओं ने पेरिस समझौते, स्वच्छ जलवायु, रक्षा और सुरक्षा के मुद्दों पर चर्चा की। अमेरिका ने भारत को बड़ा रक्षा सहयोगी बताया है।  
इसके बाद भारतीय समयानुसार सुबह करीब ढाई बजे प्रधानमंत्री ने अमेरिकी रक्षा सचिव एश्टन कार्टर से भी मुलाकात की।

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