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Saturday, 4 June 2016

चीन को साधने के लिए वियतनाम को ‘ब्रह्मोस’ बेचेगा भारत


नई दिल्ली। मालाबार में भारत-अमेरिका और जापान सैनिकों के बीच अभ्यास की ख़बर जहां पहले ही भारत के पड़ोसी चीन की आंखों में खटक रहा है तो वहीं दूसरी तरफ वियतनाम को ब्रह्मोस सुपर सोनिक मिसाइल बेचने का फैसला चीन को और नाराज कर सकता है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने रक्षा सूत्रों के हवाले से कहा है कि जिस वक्त रक्षामंत्री वियतनाम की यात्रा पर 5 और 6 जून को वियतनाम में रहेंगे, उस समय भारत-रूस के
संयुक्त प्रयास से बने 290 किलोमीटर लंबी दूरी की मारक क्षमता वाले ब्रह्मोस मिसाइल को बेचने पर भी बातचीत होगी। आवाज से भी करीब तीन गुणा ज्यादा गति से भागने वाले ब्रह्मोस मिसाइल की खरीद में वियतनाम पिछले कई वर्षों से लगा हुआ है। लेकिन, भारत को ब्रह्मोस किसी तीसरे देश को बेचने के लिए रूस के साथ संयुक्त रूप से उस बात पर सहमत होना होगा, क्योंकि इसे रुस की मदद से ही निर्मित किया गया है।दक्षिण एशिया में चीन को साधने के मकसद से भारत तेजी से वियतनाम के साथ आपसी सैन्य सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। इसके साथ ही, विवादास्पद दक्षिण चीन सागर में तेल की खोज के लिए अपने संयुक्त योजना को भी जारी रखे हुआ है। रक्षामंत्री सिंगापुर में शांग्री-ला वार्ता के बाद वियतनाम की यात्रा करेंगे। लेकिन, दक्षिण चीन सागर में चीन के आक्रामक रवैया को देखते हुए मनोहर पर्रिकर ने सिंगापुर में अपने समकक्षीय नग एंग हेन के साथ शुक्रवार को जोर देते हुए कहा कि सभी देशों को नौवहन की स्वतंत्रता का सम्मान, बेरोकटोक वाणिज्य कार्य और अंतर्राष्ट्रीय जल संसाधनों के उपयोग की इजाजत होनी चाहिए।

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