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Friday, 10 June 2016

मुस्लिम छात्रों की संख्या में 44% का भारी इजाफा, बेरोजगारी में ईसाई अव्वल

नई दिल्ली। देश में चाहे तमाम दावे किये जाते रहे हो कि कोई भी सरकार मुस्लिमों की बेहतरी के लिए कुछ नहीं किया और इन लोगों को सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के लिए इस्तेमाल किया गया। लेकिन, जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वो मुस्लिम समुदाय के बारे में कुछ और ही बयां कर रहे हैं।भारतीय छात्रों के 5 से 19 साल के बीच आयु समूह में 2001-2011 के बीच करीब 30 फीसदी की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आबादी में ये बढ़ोतरी का ये
आंकड़ा सभी धर्मों के छात्रों को जोड़कर जारी किया गया है।

अगर, मुसलमानों की बात करें तो इनमें छात्रों की संख्या में करीब 44 फीसदी की भारी वृद्धि हुई है, जिनमें से 53 फीसदी लड़कियां हैं। मुस्लिम छात्रों की आबादी में इतनी बढ़ोतरी की वजह ये है कि 5-19 साल के करीब 63 फीसदी छात्र मुस्लिम ही है। तो वहीं हिंदू छात्रों की ये संख्या 73 फीसदी के आसपास है जबकि जैन छात्रों की संख्या सबसे ज्यादा 88 फीसदी है।


जबकि, अगर काम के लिहाज से 20-29 साल के आयु वर्ग की बात करें तो देश की आबादी का करीब 20 फीसदी हिस्सा रोजगार ढूंढ रहा है। इन लोगों में से सबसे ज्यादा बेरोजगार ईसाई समुदाय से हैं। करीब 26 फीसदी ईसाई रोजगार की तलाश कर रहे थे। ये चिंता की बात इसलिए है इस वक्त ईसाई के 7 से 19 साल के करीब 71 फीसदी छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। पिछली जनगणना के समय, ईसाईयों के छात्रों की आबादी इसी आयु वर्ग में करीब 80 फीसदी तक पहुंच गई थी।

विभिन्न धर्मिक समुदायों को छात्रों की आबादी और रोजगार के बारे में विस्तृत ब्यौरा ताज़ा जनसांख्यकी जनगणना में दी गई है।

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