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Friday, 10 June 2016

अक्षय उर्जा उत्पादन क्षमता 42,849 मेगावाट पहुंची, पनबिजली उत्पादन क्षमता को पीछे छोड़ा

नयी दिल्ली, 10 जून :: नीतिगत पहल तथा सौर तथा पवन उर्जा में शुरूआती चरण में निजी निवेश से अक्षय उर्जा क्षेत्र पहली बार पनबिजली उत्पादन क्षमता से उपर निकल गया है।केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार अक्षय उर्जा क्षेत्र की कुल क्षमता बढ़कर 42,849.38 मेगावाट हो गयी। इसके साथ यह पनबिजली क्षेत्र की कुल क्षमता 42,783.42 मेगावाट से आगे निकल गयी है। वैसे 30 अप्रैल 2016 को देश की कुल स्थापित
क्षमता तीन लाख मेगावाट पहुंच गयी है।

आंकड़ों के अनुसार इसमें तापीय क्षेत्र की कुल उत्पादन क्षमता 2,11,420.40 मेगावाट रही।

पीडब्ल्यूसी के कामेश्वर राव के अनुसार सौर तथा पवन उर्जा क्षेत्र में निवेश को मजबूत केंद्रीय नीति से फायदा हुआ। साथ ही शुरूआती चरण में इन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र के निवेश से लाभ मिला।


उन्होंने कहा कि इसके विपरीत पनबिजली क्षेत्र को कई समस्याओं से सामना करना पड़ा। इसमें दीर्घकालीन वित्त पोषण की अनुपलब्धता, निजी क्षेत्र के लिये सीमित अवसर आदि हैं।

सरकार ने अक्षय उर्जा क्षेत्र में 2022 तक 1,75,000 मेगावाट बिजली क्षमता का लक्ष्य रखा है। इसमें 1,00,000 मेगावाट सौर तथा 60,000 मेगावाट पवन उर्जा उत्पादन क्षमता शामिल हैं। इसमें 150 अरब डालर के निवेश की जरूरत होगी।

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