Pages

Follow by Email

Friday, 13 May 2016

भारत और मारिशस ने दोहरे करों से बचाव की संधि के दुरुपयोग संशोधित बिल पर हस्‍ताक्षर किए

मारीशस से भारत में किए जाने वाले निवेश पर पूंजीगत लाभ कर लगाने के मकसद से इस संधि में संशोधन के समझौते पर 11 मई 2016 को हस्ताक्षर किए गए. संशोधित समझौते के अनुसार भारत-मारीशस के बीच कर संधि मौजूदा पी-नोट्स होल्डिंग्स पर लागू नहीं होगी. क्या है समझौता- एक अप्रैल 2017 से मारीशस के रास्ते धन भारत भेजने वाली कंपनियों को 24 महीने के बदलाव वाले समय के दौरान लागू दर का आधा लघु अवधि का पूंजीगत लाभ कर अदा करना होगा. ऐसे सौदों पर पूंजीगत लाभ कर की पूर्ण दर एक अप्रैल, 2019 से लागू होगी. यह दर फिलहाल 15 प्रतिशत है. इस संशोधित संधि से भारत को 31 मार्च 2017 के बाद मारीशस के रास्ते खरीदे गए भारतीय कंपनियों के शेयरों पर पूंजी लाभ कर लगाने का अधिकार मिल गया है. नई संधि के बाद अब भारत के सिंगापुर के साथ कर समझौते में इसी तरह के संशोधन तैयारी की जाएगी. यह संधि को कालाधन तथा कर चोरी के खिलाफ सबसे बड़ा करार है. अप्रैल-दिसंबर, 2015 में देश में आए 29.4 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश एफडीआई में से 17 अरब डॉलर मारीशस और सिंगापुर से आए. 2017 से लागू होने वाला गार सामान्य कर परिवर्जन रोधी नियम कर संधियों का दुरपयोग रोकने के लिए है. जिससे सरकार को संधि का दुरपयोग रोकने का अधिकार मिलता है. यह ऐसी स्थिति में लागू होता है जिनमें अनुचित कर लगाने हेतु संधि का दुरुपयोग किया जाता है. पी-नोट डेरिवेटिव के बारे में- पी-नोट डेरिवेटिव उत्पाद हैं जो भारतीय प्रतिभूति के आधार पर बिचौलियों के जरिए विदेशी निवेशकों को बेचे जाते हैं। पी-नोट के जरिए निवेश करने वाले निवेशकों को भारत में प्रत्यक्ष निवेश पर लगने वाले करों से छुटकारा मिल जाता है. पी-नोट धन किसी अन्य देश के जरिए लाया जा सकता है. मारीशस संधि का पी-नोट से कोई संबंध नहीं है. पी-नोट विदेशी कंपनियों द्वारा जारी किए जाते हैं न कि भारतीय कंपनियों द्वारा. राउंड ट्रिपिंग पर लगेगी रोक - भारतीय ही कर बचाने के लिए घुमाफिरा कर पैसा भारत भेज रहे हैं. इसे राउंड ट्रिपिंग भी कहा जाता है. वहां से आने वाला कोष वास्तवित निवेश नहीं है. भारत और मारीशस 2006 से तीन दशक पुरानी कर संधि के पहलुओं पर बातचीत कर रहे थे.

No comments:

Post a comment


This free script provided by
JavaScript Kit

Follow by Email