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Monday, 30 May 2016

ब्लीचिंग से ग्रेट बैरियर रीफ में नष्ट हुए 35 प्रतिशत कोरल

मेलबर्न, 30 मई :भाषा: ऑस्ट्रेलिया की मशहूर ग्रेट बैरियर रीफ की व्यापक ब्लीचिंग में इसके उत्तरी एवं केंद्रीय हिस्से में 35 प्रतिशत कोरल :प्रवाल:नष्ट हो गए हैं। यह जानकारी वैज्ञानिकों ने दी है और यह घटना पहले से कहीं ज्यादा व्यापक स्तर पर हुई है।
कोरल ब्लीचिंग असामान्य पर्यावरणीय स्थितियों के कारण होती हैं। इन स्थितियों में समुद्र का तापमान बढ़ जाना शामिल है। इससे कोरल छोटे प्रकाशसंश्लेषित शैवाल को छोड़ देते हैं और इनके छूटने पर कोरल सफेद रंग के हो जाते हैं। इसे ‘ब्लीच’ कहा जाता है।


कोरल वापस अपनी स्थिति को हासिल कर सकते हैं बशर्ते तापमान गिर जाए और शैवाल वापस उनसे जुड़ जाएं। वर्ना कोरल नष्ट हो सकते हैं।

पानी के नीचे और हवाई मार्ग से किए गए सर्वेक्षणों के महीनों बाद एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर कोरल रीफ स्टडीज के शोधकर्ताओं ने कोरल ब्लीचिंग से नष्ट हुए कोरल का शुरूआती आकलन जारी किया है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इसका असर धीरे-धीरे सामने आ रहा है। यह असर 2300 किलोमीटर लंबी चट्टान पर उत्तर से दक्षिण की ओर बढ़ने पर नाटकीय ढंग से बदलता है।

जेम्स कुक यूनिवर्सिटी के एआरसी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर कोरल रीफ स्टडीज के निदेशक प्रोफेसर टेरी ह्यूग्स ने कहा, ‘‘टाउंसविले और पापुआ न्यू गिनी के बीच ग्रेट बैरियर रीफ के उत्तरी और केंद्रीय हिस्सों पर हमने सर्वेक्षण किया और पाया कि 84 चट्टानों पर 35 प्रतिशत कोरल या तो नष्ट हो चुके हैं या नष्ट हो रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पिछले 18 साल में यह तीसरी बार है, जब ग्रेट बैरियर रीफ की ग्लोबल वार्मिंग के कारण व्यापक ब्लीचिंग हो गई है। इस बार यह घटना पहले की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘ये तीन घटनाएं वैश्विक तापमान औद्योगिक काल से पहले के तापमान में एक डिग्री सेल्सियस की वृद्धि होने पर हुई हैं। हम ग्रीन हाउस गैसों में कटौती के समय के लिहाज से तेजी से पिछड़ रहे हैं।’’

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